Otter Facts In Hindi: नमस्ते दोस्तों। सोचिए एक भेड़िया जो जंगल में नहीं बल्कि पानी में रहता है। एक ऐसा शिकारी जो अपने परिवार के साथ मिलकर शिकार करता है और जिसकी धाड़ पानी में दूर-दूर तक सुनाई देती है। दक्षिण अमेरिका के अमेज़ॅन जंगल में। वहां मिलेंगे खास जानवर, जिनका नाम जॉइन और तर है। इसे उद्बिलाप भी कहा जाता है। अब आप सोच रहे होंगे वो क्या होता है। तो चलिए मैं आपको बताता हूँ। विलाप एक ऐसा जानवर है जो ज्यादातर पानी में रहता है।

मछलियां पकड़ता है और अपने परिवार के साथ रहता है और इसकी लंबाई लगभग 6 फीट तक हो सकती है। एक परिवार में दो से लेकर 20 सदस्य तक हो सकते हैं। जिनका ध्यान यह परिवार का सबसे ताकतवर सदस्य रखता है। यानी उनके माता-पिता और यह मिलकर शिकार करते हैं और अपने बच्चों को पालते हैं और अपनी इलाके की रक्षा करते हैं। जब यह शिकार पर निकलते हैं, तो यह किसी भेड़ के झुंड की तरह काम करते हैं। एक साथ मिलकर मछलियों को घेरते हैं और फिर उन पर हमला करते हैं।

इनका शिकार करने का तरीका इतना शानदार है कि यह अकेले एक मगरमच्छ के बच्चे या एंडाकोंडा को भी मार सकते हैं। इसलिए इन्हें पानी के भेड़िया भी कहा जाता है। इनका कॉम्बिनेशन का तरीका भी बहुत अलग है। ये आवाज से एक-दूसरे से बात करते हैं। इनके पास 22 अलग-अलग तरह की आवाजें होती हैं। ये आवाजें चेतावनी देने, खेलने, अपने परिवार के सदस्य को बुलाने के लिए होती हैं। इनकी ये तेज आवाजें जंगल की मीलों तक सुनाई देती हैं।

ओतर एक नहीं बल्कि 13 अलग-अलग प्रजातियों में पाए जाते हैं। कुछ नदी में रहते हैं, जैसे स्मूथ कॉस्केट ओटर, जिसे आप देख रहे हैं, और कुछ समुद्र में रहते हैं। जैसे सी ओतर जो आप अभी स्क्रीन पर देख रहे हैं। भारत में हमें इनकी तीन प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं। ओतर में प्रजनन का तरीका ज्यादातर बाकी जन्म जैसा ही होता है। प्रजनन के समय नर और मादा मिलते हैं और मादा अक्सर पानी में समूह को प्राथमिकता देती है। नर औरतर आमतौर पर मादा को गर्दन से पकड़ता है।

यह व्यवहार कई मांसाहारी जानवरों में पाया जाता है। सम्मुख में कई बार आक्रामकता दिख सकती है, लेकिन यह प्रजनन की प्रक्रिया का हिस्सा होती है। एक मादा हर साल एक से तीन बच्चों को जन्म देती है। सीओतर की खाल में प्रति वर्ग इंच में लगभग 10 लाख बाल होते हैं। यही वजह है कि यह बर्फीले पानी में कांपता नहीं है और अपना शिकार आसानी से कर लेता है। मादा ओतर अपने बच्चों को खुद तैनात सिखाती है और कई महीनों तक दूध पिलाती है।

इनका पारिवारिक जीवन इंसानों से कुछ कम नहीं है। जब यह समुद्र में तैरते-ती सोते हैं, तो यह एक दूसरे का हाथ पकड़ के सोते हैं ताकि लहरें इन्हें अलग ना कर सकें। इसे कहते हैं लिफ्टिंग बिहेवियर। अगर आपको किसी नदी में ओथर दिख जाए तो समझ जाना कि वह नदी शुद्ध और स्वस्थ है। वैज्ञानिक ने पाया है कि ओतर एक खास आवाज निकालते हैं जिसे वो अपने साथी या बच्चे को उनके नाम की तरह बुलाते हैं। पानी में जाते ही इनके कान व नाक अपने आप बंद हो जाते हैं।

एक अनोखी प्रक्रिया है ताकि पानी इनके अंदर न घुस सके। इसलिए यह बड़े आराम से गोद में लगा सकते हैं। मई में हर साल वर्ल्ड ऑथर डे मनाया जाता है। इस दिन लोग ऑथर के बारे में जानकारी फैलाते हैं और उन्हें सुरक्षित रखने का संकल्प लेते हैं। ऑथर पानी के भीतर 4 से 8 मिनट तक सांस रोके रह सकता है। जरूरत पड़ने पर वे 100 मीटर की गहराई में डाइव लगा सकते हैं। इस विशेषता के कारण वे सिर्फ सताई शिकारी बल्कि गहरे पानी में रहने वाले जीवों तक भी पहुंच सकते हैं और अपना शिकार कर सकते हैं।
इनके पैरों की उंगलियों के बीच में झिल्ली होती है जिसे बेडिंग कहते हैं। यह इन्हें देने में अद्भुत क्षमता प्रदान करती है। इस वजह से ओथर पानी में ऐसी फुर्ती से तैरता है जैसे कोई पेशेवर तैर रहा हो। हाल ही में अक्सर पानी में रहते हैं। लेकिन इनकी सेंस ऑफ स्मेल जमीन के स्तनधारियों जितनी तेज होती है। ये गर्म से लेकर अपने साथियों को पहचानते हैं। क्षेत्र का पता लगा सकते हैं और संभावित खतरे को दूर से भाप लेते हैं।

यह उन्हें पानी और जमीन पर लेने में मदद करता है। पोत मछली को पकड़ने के बाद उसे सीधे नहीं खाते। वे पहले उसे पानी में घुमा-घुमाकर साफ करते हैं और फिर खाते हैं। यह स्वस्थ की एक अत्यंत दुर्लभ आकर्षक आदत है जो दर्शाती है कि वे भोजन को केवल पेट भरने के लिए नहीं खाते बल्कि सजगता और आदर के साथ ग्रहण करते हैं। भारत में, खासकर असम और बंगाल में, ओथर को पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।
स्थानीय लोग इन्हें नाव के साथ नदी में ले जाते थे और उतरकर पानी में जाकर मछली खाकर जाल की ओर ले आते थे। यह मानव और जानवर के बीच सहयोग की अद्भुत मिसाल है। 1940 से 1970 के दौरान इनके मकबूल और शानदार फर्क के लिए इनके बेरहमी से शिकार किया गया। इनके फर्श से बने कपड़े और कोट बहुत महंगे बिकते हैं। इस वजह से इनकी आबादी में 80% से ज्यादा गिरावट आई है। आज भी कुछ इलाकों में इनका अवैध शिकार जारी है। अमेज़ोन के जंगल को लगातार काटा जा रहा है।

सोने की खदान, खेती और बांधों का निर्माण। इन सबने इनके घरों को लगातार तबाह कर दिया है। सोने की खदानों से निकलने वाला पारा नदियों में मिलाया जाता है जो मछलियों और फिर उन्हें खाने वाले विशाल औरत के शरीर में पहुंच जाता है। यह जहर इन्हें धीरे-धीरे खत्म कर देता है। कई मछुआरे इन्हें अपना दुश्मन मानते हैं क्योंकि ये मछलियों को खाते हैं। इस टकराव में भी कई विशाल औरतें मारी जाती हैं। तो क्या कोई उम्मीद बाकी है? हां, बिल्कुल।
आज दुनिया भर में इनके संरक्षण के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर इनके इलाकों को सुरक्षित किया गया है। जहां इन्हें शिकार से बचाया जाता है। कई संस्थाएं लोगों को इनके बारे में जागरूक करती हैं ताकि इनके फर् और कोर्ट की मांग खत्म हो जाए। अगर आपको यह वीडियो अच्छा लगा तो लाइक करिए।